स्वास्थ्य विभाग को नहीं थी घर में प्रसव की जानकारी, विकासखंड से करीब 13 किमी पर व्यवस्था नही तो दुरस्त अंचलों के ग्रामो का क्या हाल
महिला बाल विकास परियोजना विभाग की समझाइश के बाद माता-पिता हुए तैयार
आमला। विकासखंड आमला के ग्राम तिरमहू में करीब डेढ़ माह के बच्चे को महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल पर जिला चिकित्सालय स्थित एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनिता आथनकर ने बताया गया कि बच्चे का जन्म 23 जुलाई को ग्राम तिरमहू में सनम पति संतोष के घर पर ही हुआ था। घर में प्रसव होने की जानकारी न तो स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी और न ही बाल विकास विभाग को दी गई थी।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनीता आथनकर ने बताया कि उक्त पति पत्नि मजदूरी के लिये एक वर्ष पूर्व महाराष्ट्र के नागपूर गए थे। जो वापस अपने ग्राम 7जुलाई 2026 को आए थे। ओर पत्नी सनम की 23 जुलाई2026 को घर पर ही डिलेवरी हो गई। उक्त महिला प्रेग्नेंट है इसकी जानकारी दोनों पति पत्नी के द्वारा जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा वर्कर को भी नहीं दी गई थी। ओर प्रसव होने के बाद भी जानकारी नहीं दी गई।
विभागीय अमले को जब इसकी जानकारी मिली, तब तक बच्चे के जन्म को करीब एक माह बीत चुका था।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया की कई बार माता-पिता को बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराने की समझाइश दी गई थी। लेकिन माता-पिता कभी इसके लिए तैयार नहीं हुए।

बीएमओ व स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घर पर विजिट कर बच्चे को तत्काल एनआरसी में भर्ती कराने के मौखिक निर्देश दिए जाने के बावजूद बच्चे को आमला सिविल अस्पताल लाने की भी कार्रवाई नहीं हो सकी।
उक्त मामले की जानकारी महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी निर्मल सिंह ठाकुर को मिलने के बाद उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए सेक्टर पर्यवेक्षक वर्षा पंवार ओर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनिता आथनकर के साथ ग्राम तिरमहू पहुंचकर बच्चे के माता-पिता से चर्चा की। अधिकारियों ने परिजनों को बच्चे के उपचार और शासन की योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देते हुए समझाइश दी।
इसके बाद माता-पिता बच्चे को जिला चिकित्सालय ले जाने के लिए तैयार हुए। एंबुलेंस के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को साथ भेजकर बच्चे को जिला चिकित्सालय स्थित एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया। परिजनों को बताया गया कि शासन की योजनाओं के अंतर्गत बच्चे का उपचार कराया जाएगा तथा आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

फील्ड स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने आमला विकासखंड से मात्र करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर स्वास्थ्य विभाग की मैदानी निगरानी और जागरूकता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक माह से अधिक समय तक घर में हुए प्रसव और नवजात की स्थिति की जानकारी संबंधित स्वास्थ्य अमले तक नहीं पहुंचना फील्ड स्तर की निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। तो उच्च अधीनस्थों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। जब विकासखंड से समीपस्थ ग्राम का यह हाल है तो दुरदराज में स्थित ग्रामो में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था का आलम क्या हो सकता है?
वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल के बाद बच्चे को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया जा सका। मामले के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और विभागीय मैदानी अमले की सक्रियता को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
इनका कहना
मुझे जानकारी मिलते ही मैं ओर मेरी टीम मेम्बर 29अगस्त को सेक्टर पर्यवेक्षक के साथ तत्काल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को लेकर ग्राम तिरमहू पहुंचे जहां से नवजात शिशु व माता पिता को समझाकर स्वयं साथ रहकर जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया।
निर्मल सिंह ठाकुर
प्रभारी सीपीडीओ
महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी आमला
इनका कहना
मैं फील्ड विजिट में 27 अगस्त को गया था गाड़ी नहीं मिलने के कारण रैफर कर नहीं पाये। हमने खुद गाड़ी करके भैजा जिसके तीन हजार रूपये दिये गये है।
डॉ. प्रदीप जयंत
बीएमओ सिविल अस्पताल आमला
बच्चे को भर्ती 29 अगस्त को करवा दिया है बच्चे के माता पिता बैतूल जाने को तैयार नहीं थे उन्होंने लिखकर दिया था की हमारे बच्चे की जिम्मेदारी हमारी है इसको कुछ भी होता है तो इसके जवाबदेही हमारी है। मै भी बीएमओ सर के साथ था। 29 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की टीम में सभी थे एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आदि।
सुभाषचंद्र गुजरकर
(बीसीएम) ब्लॉक कमुयूनिटी मोबीलाईजर







