केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने किया निरीक्षण
पंढरपुर। लाखों वारकरों की ‘पलट’ के उद्देश्य से पुनर्विकास हो रहे संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी रोड (राष्ट्रीय राजमार्ग-965) के कार्य का आज निरीक्षण किया।

भारत की सनातन परंपरा में वारकरी संप्रदाय की पैदल यात्रा अर्थात ‘वारी’ आस्था, तपस्या और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष आषाढ़ी एकादशी पर लाखो वारकरी पालकी सहित पंढरपुर की यात्रा करते हैं। हालांकि कई वर्षों से इस वारी में मोटर वाहन संगठन, अरुंद की सड़कों, यातायात बढ़ाना और विशेष रूप से अरुंद, गोताखोर पियर का कठिन और खतरनाक चरण जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन समस्याओं के समाधान के रूप में संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-965 व संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-965 जी मार्गो के व्यापक पुनर्विकास की परियोजना को हाथ में लिया गया, जो अब पूर्ण होने की ओर है। अतः लाखो वारकऱ्याओं की बारी सुखद व सुखद होने वाली है।

संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग-965) आळंदी से पंढरपुर और आगे मोहोल से वाखरी तक लगभग 234 किमी का राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो पुणे, सतारा और सोलापुर जिलों को जोड़ता है। 7,625 करोड़ रुपये के प्रावधान से विकसित हो रही इस सड़क का निर्माण मोहोल से वाखरी, वखरी से खुदुस, खुदुस से धर्मपुरी, धर्मपुरी से लोनंद, लोनंद से गोता घाट और गोता घाट से हडपसर जैसे 6 पैकेज में हो रहा है। इनमे से 4 पैकेज का काम पूरा हो चुका है और धर्मपुरी से लोनंद का काम अंतिम चरण में है जबकि गोता घाट से हडपसर तक 65% पैकेज पूरा हो चुका है। यह मार्ग सासवड, लोनंद, फलटन, नटपुते, माळशिरस और पंढरपुर जैसे क्षेत्रों को बाईपास करते हुए तेज और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करता है।

इस मार्ग पर वारकरी के लिए अलग से पैदल मार्ग बनाया गया है, जिससे वारकरी यात्रा अधिक सुरक्षित और सुरक्षित हो गई है। विशेष रूप से डाइव घाट को धारा-2 से 4 लेन में चौड़ा और मजबूत किया जा रहा है जिससे दुर्घटनाओं की दर कम होगी और यात्रा को और आसान बनाया जाएगा। इसके अलावा फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज, अंडरपास और आधुनिक पुल के माध्यम से रूट को और सक्षम बनाया गया है। पालखी रोड पर सड़क निर्माण के दौरान आने वाले पेड़ों का प्रत्यारोपण कर उन्हें नवीकरण जीवन प्रदान किया, साथ ही सड़कों के किनारे देशी व छाया प्रदान करने वाले पेड़ लगाए। सासवड़, नीरा, लोणंद, फलटन, नतापुते, माळशिरस, पंढरपुर में सुरक्षा के दृष्टि से बाहरी सड़कों का प्रस्ताव रखा गया है।

वारकरों की सुविधा हेतु मालशिरस के पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक कुँआ, वेलापुर व वाखरी के निकट बाजीराव कुँआ की प्राचीन गुफाओं को मिलाकर ऐतिहासिक विरासत को संजोकर रखा गया है। संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी मार्ग पर काम करते हुए सोलापुर और सतारा जिले में बुलढाणा पैटर्न की भूमि पर लगभग 43 तालाबों को कमरा बनाया गया है और वहाँ मुरूम, मिट्टी राजमार्ग है। यह अतिरिक्त जल भंडारण का कारण बना है और जल स्तर में वृद्धि हुई है।











