कैंसर की बीमारी के चलते हुआ निधन, गंज में हुई अंत्येष्टि
बैतूल। सालों के कैलेंडर मुंह जबानी याद रखने वाले बैतूल के दिनेश खुराना ने शनिवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। श्री खुराना अपने आप मे कई खूबी रखते थे। उन्हें किसी भी महीने की तारीख व दिन को पता करने के लिए कलेंडर पलटने की जरूरत नहीं होती थी। वे पलक झपकते ही सबकुछ बता देते थे। यहां तक देश विदेश में होने वाली प्रमुख घटनाएं तक उन्हें तारीख और दिन के साथ याद रहती थी।
दोस्तों की शादी से लेकर उनके बच्चों के जन्मदिन तक याद थे। उनकी इस याददाश्त के सभी कायल थे। राजनीतिक क्षेत्र में भी उनका दखल था। स्वर्गीय विनोद डागा कब पहली बार विधायक बने थे और मुन्नी भैया यानी विजय कुमार खंडेलवाल कब पहली बार सांसद बने इसकी तारीख और दिन भी उन्हें याद था।
कई बार ऐसे मौके भी आए जब उन्होंने अपने दोस्तों को ही उनकी शादी की तारीख और दिन बताकर चौंका दिया था। अपनी इस याददाश्त की बदौलत बैतूल शहर में वे प्रसिद्धि बटोर चुके थे, लेकिन वह अब इस दुनिया में नहीं है।
उन्होंने एक दिन मुझसे अपनी इन खूबियों पर चर्चा करते हुए ये बात बताई थी। उस समय मैने इसका एक समाचार प्रतिष्ठित अखबार में लगाया था।

उनका कहना था व्यवसाय से जुड़े होने के कारण हर बात याद रखनी पड़ती थी, इसलिए आदत में आ गया और कलेंडर को याद रखने की एक ट्रिक है, इसकी बदौलत वे दिन और तारीख बता देते हैं। डॉक्टर भी उनकी इस याददाश्त को लेकर कहते थे कि किसी व्यक्ति में याद रखने की प्रवत्ति तेज होती है। इसके कारण उन्हें सबकुछ याद रहता है। बहरहाल उनकी दुनिया से विदाई के बावजूद उन्हें इस बहाने हमेशा याद किया जाता रहेगा।
उल्लेखनीय है कि वे बैतूल के व्यवसायी स्वर्गीय देशराज खुराना के बड़े बेटे थे। करीब दो माह पहले आंतों के कैंसर का पता चला। पाढर के कैंसर अस्पताल में वे भर्ती थे। डाक्टर के द्वारा दवाई का कोई असर न होने की सलाह पर उन्हें आज दोपहर बाद घर बैतूल लेकर आ गए थे, जहां उनका निधन हो गया। कोठीबाजार राम मंदिर किराना दुकान के व्यवसायी दिनेश खुराना अपने पीछे पत्नी सुनीता, बेटा रोहित और बेटी साक्षी को छोड़ गए। उनके छोटे भाई जीतेन्द्र, भूपेन्द्र ( बबलू ) शैलेन्द्र ( बिट्टू) और दीपक खुराना हैं।
रविवार को गोकुलधाम स्थित निवास से अंतिम यात्रा निकालकर उनका गंज मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किया गया। पंजाबी समाज के अलावा जिलेभर के गणमान्य नागरिकों, व्यवसायियों ने उन्हें श्रृध्दांजलि अर्पित की।






