45 साल पुराने ट्रांसफार्मर को दी बिजली बनाने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने विदाई
45 वर्षो तक निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने के बाद एमपी ट्रांसको का पावर ट्रांसफार्मर हुआ रिटायर
ट्रांफार्मर ने दुगनी सेवा देने का इतिहास बनाया यह अपने आप मे एक बड़ी बात
बैतूल। आमतौर पर आपने किसी कर्मचारी की सेवा पूरी होने पर उसके रिटायरमेंट होने और विदाई समारोह का आयोजन किए जाने की बात तो सुनी होगी, लेकिन सारणी ताप विद्युतगृह में बुधवार को कुछ अनूठा हुआ। यहां पर एमपी टास्को बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने एक मशीन को सेवा अवधि पूर्ण होने के बाद रिटायर होने पर एक कर्मचारी के रूप में भावुक पलों के साथ विदाई दी। इसके साथ ही मशीन के गौरव में इतिहास को भी दोहराया गया।

ट्रांफार्मर ने दुगनी सेवा देने का इतिहास बनाया यह अपने आप मे एक बड़ी बात
दरअसल यह मशीन एक ट्रांसफार्मर थी।
मध्यप्रदेश की विद्युत पारेषण व्यवस्था के इतिहास में ट्रांसफार्मर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दो दशक का सेवाकाल निश्चित होने के बावजूद इस ट्रांसफार्मर ने चार दशकों से अधिक सेवा दी थी। इसके चलते कर्मचारियों का इस मशीन से लगाव हो गया था। इस मशीन का रिटायर्ड का समय आने पर एक भावुक और गौरवपूर्ण रूप से एमपी ट्रांसको के कार्मिकों ने इस मशीन को विदाई। एमपी ट्रांसको के बैतूल जिले में स्थित एसटीपी सतपुड़ा ताप विद्युतगृह सारणी के 220 केवी सबस्टेशन में 1978 में 100 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया था। लगातार 45 वर्षों तक निर्बाध सेवाएं देने के बाद ट्रांफार्मर सम्मानपूर्वक रिटायर हुआ। उल्लेखनीय है कि सन् 1978 मे निर्मित इस ट्रांसफार्मर की निर्धारित कार्य अवधि लगभग 25 वर्ष थी, किंतु मध्यप्रदेश विद्युत मंडल तथा बाद में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के इंजीनियरों एवं तकनीकी कर्मचारियों की कुशल मेंटेनेंस, सटीक तकनीकी प्रबंधन और उत्कृष्ट कार्य दक्षता के कारण इसने दोगुनी अवधि तक विश्वसनीय सेवाएं दीं।
प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली पहुंचाने में रहा था अहम योगदान
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि सारणी ताप विद्युतगृह से उत्पादित होने वाली बिजली को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक सुरक्षित एवं सतत् रूप से पहुंचाने में इस ट्रांसफार्मर की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। बीते करीब साढे चार दशकों में इस ट्रांसफार्मर ने न केवल प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती प्रदान की, बल्कि मध्यप्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं सामाजिक विकास की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मौन आधार स्तंभ की तरह योगदान दिया। यह ट्रांसफार्मर प्रदेश की ऊर्जा अवसंरचना के विकास का साक्षी रहा है।
ऐसे दी भावुक विदाई
एमपी ट्रांसको के कार्मिकों ने इस ऐतिहासिक ट्रांसफार्मर को भावुक विदाई देते हुए उसकी दीर्घ, विश्वसनीय और समर्पित सेवाओं को याद किया। पुराने 100 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर अब सारणी 220 केवी सबस्टेशन में 160 एमवीए क्षमता का अत्याधुनिक पावर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र की पारेषण क्षमता और विद्युत विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बैतूल के साथ रेलवे ट्रैक्सन फीडर को मिलेगी विश्वसनीय बिजली
एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य ने बताया कि इस पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के बाद 220 केव्ही सबस्टेशन सारणी की क्षमता बढकर 320 एमवीए की हो गई है। इससे विश्वसनीयता बढने के साथ तीन 132 केव्ही सबस्टेशनो को फायदा मिलेगा। इसके अलावा रेलवे ट्रैक्सन घोड़ाड़ोंगरी के दोनों फीडर को भी गुणवत्ता पूर्ण विश्वसनीय सप्लाई उपलब्ध रहेगी।
बैतूल जिले की क्षमता में वृद्धि
ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से बैतूल जिले की कुल स्थापित क्षमता 740 एमवीए से बढ़कर 800 एमवीए हो गई।
एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य ने बताया कि इस एमपी ट्रांसको बैतूल जिले में अपने 220/132 केव्ही के तीन एवं 132/33 केव्ही के छह सब स्टेशन के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है। इधर कंपनी के पीआरओ शशिकांत ओझा ने बताया कि बहुत कम ऐसा देखने आता है कि निश्चित अवधि से दुगने स्तर पर कोई मशीन चली हो, लेकिन इस ट्रांफार्मर ने दुगनी सेवा देने का इतिहास बनाया है। यह अपने आप मे एक बड़ी बात है। उन्होंने बताया कि इस ट्रांसफार्मर को रखा भी जा सकता है और इसकी अवसर आने पर नीलामी भी की जा सकती है।








