आमला। सरकार भले ही ‘हर घर जल’ का दावा करे, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद चिंताजनक है। आमला तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोरखा के रामदीनढाना में पानी का ऐसा भीषण संकट खड़ा हो गया है कि ग्रामीण और उनके पालतू पशु बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हो चुके हैं। इस गंभीर समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने जनसुनवाई में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन सौंपकर गांव में नया शासकीय बोर खनन कराने की गुहार लगाई है।

जल संकट की मार: न हैंडपंप चल रहे, न नल से आ रहा पानी, कुआं सुख गया
नीतू धुर्वे, रीता नर्रे, जमना रघुवंशी, रमेश नर्रे आदि ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन के अनुसार ग्राम मोरखा के रामदीनढाना में लगभग 43 परिवार निवास करते हैं। गांव में पानी की आपूर्ति के लिए दो हैंडपंप लगाए गए थे, जो अब पूरी तरह सूख चुके हैं और उनसे पानी आना बंद हो गया है। वही कुआं भी भीषण गर्मी के कारण सुख गया है।

संजना, कमला, सुखवंती ऊईके, संदीप ने बताया की हैरान करने वाली बात यह है कि गांव में प्रधानमंत्री नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन और बुनियादी ढांचा तो तैयार किया गया है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को योजना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। नल की सुविधा होने के बाद भी पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है, जिससे करोड़ों की यह योजना इस गांव के लिए सफेद हाथी साबित हो रही है।

पशुओं के सामने भी खड़ा हुआ संकट
गांव में इन दो सूखे हैंडपंपों व एक कुएं के अलावा अन्य कोई सरकारी नलकूप या कुआं नहीं है। पानी का कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। भीषण गर्मी के इस दौर में ग्रामीण पानी की तलाश में मीलों भटकने को मजबूर हैं।

जनसुनवाई में गूंजी ग्रामीणों की आवाज
समस्या से थक-हारकर समस्त ग्रामवासियों की ओर से पंचायत द्वारा नया शासकीय बोर करवाने की अनुमति प्राप्त करने हेतु जनसुनवाई में आवेदन दिया गया है। ग्रामीणों की इस सामूहिक अर्जी को प्रशासन ने जनसुनवाई आमला मे दिनांक 19 मई 2026 को आवक जावक पर दर्ज कर लिया है।

अब देखना यह होगा कि जनसुनवाई में पहुंचे इस संवेदनशील मामले पर प्रशासनिक अधिकारी कितनी तत्परता दिखाते हैं और इन 43 परिवारों को कब तक इस भीषण जल संकट से मुक्ति मिलती है।
जब इस सम्बंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से वर्जन देने के लिये कहा तो उन्होंने पीएचई विभाग से बात करने का कहकर टालामटोली कर दी। जहां पीएचई विभाग के अधिकारी मिले ही नहीं।








