बैतूल। कहते हैं कि बच्चों के सपनों को उड़ान देने के लिए माता-पिता खुद को झुलसाने से भी पीछे नहीं हटते। ऐसी ही एक मर्मस्पर्शी तस्वीर रविवार को बैतूल के एमएलबी स्कूल के सामने देखने को मिली, जहां नीट (NEET) की परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों से ज्यादा उनके अभिभावकों के धैर्य की परीक्षा हो रही थी।
भीषण गर्मी और इंतजार का इम्तिहान
शहर का तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच झुलसा रहा था। गर्म हवाओं और चिलचिलाती धूप के बीच, एमएलबी स्कूल के बाहर नजारा कुछ ऐसा था कि हर किसी की आंखें नम हो जाएं। स्कूल के भीतर बच्चे डॉक्टर बनने का सपना लिए पर्चा हल कर रहे थे, तो बाहर उनके माता-पिता सड़क पर ओर सड़क किनारे लगे पेड़ों की ओट में और स्कूल की बाउंड्रीवॉल से चिपककर छांव तलाश रहे थे।

जमीन पर बैठकर किया घंटों इंतजार
सुविधाओं के अभाव और भीषण तपन के बावजूद इन अभिभावकों के चेहरे पर थकान से ज्यादा अपने बच्चों के भविष्य की चिंता और उम्मीद थी। भीड़ में एक पिता तो तपती सड़क पर ही बैठकर मोबाइल देखते हुए परीक्षा खत्म होने का इंतजार करते नजर आए।

त्याग की पराकाष्ठा
यह दृश्य इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक बच्चे के करियर के पीछे सिर्फ उसकी पढ़ाई नहीं, बल्कि उसके माता-पिता का ‘मौन त्याग’ होता है। सड़कों पर खड़े रहकर घंटों तपन बर्दाश्त करने का यह मकसद सिर्फ इतना है कि उनका बच्चा एक बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा सके।
सोशल मीडिया पर भी इस तस्वीर की काफी चर्चा हो रही है, जहां लोग इसे ‘निस्वार्थ प्रेम और त्याग की सबसे सुंदर तस्वीर’ बता रहे हैं। सच ही है, दुनिया में माता-पिता से बड़ा कोई सहारा और उनके आशीर्वाद से बड़ी कोई छांव नहीं होती।
”यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे परिवार का संघर्ष है। हम धूप सह लेंगे, बस बच्चा अपनी मेहनत में सफल हो जाए।” — शकील खान परिक्षार्थी के पिता







