आमला। चैत्र नवरात्रि पर्व के पावन समापन और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव ‘श्रीराम नवमी’ के अवसर पर आमला नगर के मेन मार्केट स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर में भारी उत्साह देखा गया।
स्थानीय निवासी मदनलाल गुगनानी ने बताया की इस अति प्राचीन मंदिर मे यहां पर भगवान श्रीराम अपने पुरे परिवार माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न सहित हनुमान जी के साथ अलौकिक रुप में विराजमान हैं। इन सभी प्रतिमाओ को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रभू सपरिवार प्रत्यक्ष बैठे हुए हैं। इन सभी प्रतिमाओ पर इतना तेज प्रकट था। श्रीराम नवमी पर्व पर मंदिर परिसर और आसपास के परिक्षेत्र में विशाल मेले का आयोजन किया गया, जिसमें जनसैलाब उमड़ पड़ा।

मंदिर धार्मिक अनुष्ठान और महाआरती
सुबह से ही मंदिर में श्रृद्धालुओं की भींड शुरू हो गई थीं। मंदिर के पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्रीराम के अभिषेक के साथ लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के साथ माता सीता का भी अभिषेक किया गया। दोपहर 12 बजे जैसे ही ‘भये प्रकट कृपाला’ के स्वर गूंजे, मंदिर परिसर जय श्रीराम के नारों से गुंजायमान हो उठा। इसके पश्चात भव्य महाआरती हुई और विशेष भोग लगाया गया।

विशाल मेले का आकर्षण
मेंन मार्केट में सजे इस मेले में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचे।
मेले के मुख्य आकर्षण रहे:
हस्तशिल्प और खिलौने: बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने और हाथ से बनी वस्तुओं की दुकानों पर खासी भीड़ रही। वहीं बलून, सीटी, त्रिशुल तलवार परी स्टार आदि जैसे बच्चौ के खिलौने मार्केट में रहे। सबसे ज्यादा बच्चौ में फुलने वाली सीटी की डिमांड देखी गई जो कई बच्चौ को मिल नहीं पाई।

पारंपरिक व्यंजन: गरमा-गरम जलेबी, चाट और आइसक्रीम, बर्फ के गोले सहित अन्य व्यंजनो का लोगों ने भरपूर आनंद लिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: मंदिर प्रांगण में भजन मंडलियों द्वारा सुंदरकांड और रामचरितमानस का पाठ किया गया।
महाप्रसादी का वितरण भी समिति के सदस्यों द्वारा किया गया।

सुरक्षा और व्यवस्था
भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल ने पुख्ता इंतजाम किए थे। में मार्केट की सड़कों पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित कर उसे ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया था, ताकि पैदल चलने वाले श्रृद्धालुओं को असुविधा न हो। मंदिर समिति के सदस्यों ने पेयजल और व्यवस्था प्रबंधन में सराहनीय सहयोग दिया।

“यह मंदिर सदियों से हमारी आस्था का केंद्र है। हर साल की तरह इस बार मेले का स्वरूप और कम हो गया है, इस तरह के मेलो में लोगों को अपने परिवार सहित आना चाहिऐ जिससे हमारी संस्कृति जीवंत रह सके है।”
संजय साहू
अध्यक्ष व्यापारी संघ आमला






