बैतूल। गुरु-शिष्य के प्रेम की परंपरा पुरानी है। गुरु पूर्णिमा पर हम आपको ऐसे गुरुओं से मिलाते हैं जो न केवल शिक्षा का दान कर रहे थे बल्कि अपने रिटायरमेंट के बाद वे बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए पैसों का भी दान कर रहे हैं। उनका इसके पीछे का उद्देश्य केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा हासिल करने में मदद करना है।
रिटायर्ड प्रोफेसर व शिक्षक दानवीर गुरूओ में शामिल
बैतूल के जेएच कॉलेज के प्रोफेसर व स्कूलों के रिटायर्ड शिक्षक दानवीर गुरूओ में शामिल हैं, जो रिटायरमेंट के बाद अपनी पेंशन की राशि से हर साल छात्रों को स्कॉलर देकर पढ़ाई में उनकी मदद कर रहे हैं। वैसे बैतूल में इसकी शुरुआत महादानी स्व. जयवंती हॉक्सर ने की थी। जिन्होंने बैतूल को करीब 17 एकड़ की जमीन के साथ एक कॉलेज दिया और उनकी जमा पूंजी से अब तक छात्रों को स्कॉलर मिल रही है। अब बैतूल के इसी कॉलेज के रिटायर प्रोफेसर इस परंपरा को निभा रहे हैं।
ये रिटायर प्रोफेसर करते हैं छात्रों की मदद–
प्रोफेसर केके अग्निहोत्री
जेएच कॉलेज में रसायन शास्त्र विषय के प्रोफेसर अग्निहोत्री ने रिटायर होने के बाद अपने सब्जेक्ट के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था की शुरुआत की। रसायन शास्त्र विषय के टॉपर पास आउट छात्र को हर साल तकरीबन 11 हजार रुपए की स्कॉलरशिप दी जाती है। पहले वे ही यह स्कॉलरशिप देते थे, अब परिवार के लोग उनकी स्मृति में देते हैं।
प्रोफेसर डॉ. केआर हलदार
ये हैं वाणिज्य यानी कॉर्मस विषय के प्रोफेसर केआर हलदार ने अपने रिटायरमेंट के बाद स्कॉलरशिप देने की पहल की। इसके लिए उन्होंने कॉलेज को 25 हजार रुपए की राशि दी। इस जमा राशि से हर साल कॉर्मस विषय के टॉपर छात्र को जमा राशि से स्कॉलरशिप दी जाती है।

प्रोफेसर डॉ. रामाधार डेहरिया
गणित विषय के प्रोफेसर डॉ. रामाधार डेहरिया भी रिटायर होने के बाद गणित विषय के छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए स्कॉलरशिप देते हैं, वह भी एक नहीं, चार छात्रों को इसमें एसटी, एससी, ओबीसी और जनरल वर्ग के छात्र शामिल होते हैं। उन्होंने भी इसके लिए कॉलेज के बैंक अकाउंट में 1 लाख 25 हजार की राशि जमा कर दी है। इससे आने वाले ब्याज से इन वर्ग व विषय के टॉपर छात्रों स्कॉलरशिप दी जाती है।

प्रोफेसर डॉ.एमके मेहता
वनस्पति शास्त्र के प्रोफेसर एमके मेहता ने भी रिटायरमेंट के बाद इस परंपरा को जारी रखा। वे भी अपने सब्जेक्ट के टॉपर छात्र को प्रोत्साहित करने 5 हजार रुपए की स्कॉलरशिप देते हैं। यह स्कॉलरशिप वे उनकी पत्नी प्रोफेसर अर्चना मेहता के साथ देते हैं।

स्कूल के रिटायर्ड प्रभारी प्रिंसिपल आनंद साहू
कालेज के प्रोफेसर ही नहीं बल्कि स्कूल के रिटायर्ड शिक्षक भी बच्चों की पढ़ाई में मदद करते हैं। चिखली स्कूल के उस समय प्रभारी प्रिंसिपल आनंद साहू ने बच्चो से बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर अपनी तरफ से प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया था। स्कूल की आदिवासी छात्रा के अच्छे अंक लाने पर उसे 5 हजार रुपए की राशि देकर सम्मानित किया। ऐसे कई शिक्षक हैं, जो शिक्षा के दान के बाद छात्रों को पढ़ाई करने और आगे बढ़ने के लिए अपनी जमा पूंजी से प्रोत्साहन राशि दे रहे हैं।

लोग बोले- काबिले तारीफ गुरू
कॉलेज के प्रोफेसरों व स्कूल के शिक्षक का छात्रों को पढ़ाई में मदद करने की इस पहल की सभी ओर तारीफ व चर्चा होती है। इससे बच्चे भी पढ़ाई में रुचि लेते हैं।







