घोड़ाडोंगरी की आमजनता को है कई उम्मीदे
घोड़ाडोंगरी। ग्राम पंचायत से नगर परिषद बने घोड़ाडोंगरी की आमजनता नगर के विकास की बाँट जोह रही है। नगर परिषद बने लगभग 6 वर्ष हो रहे हैं नगर परिषद मे हुए चुनाव को भी 4 वर्ष पूरे हो रहे हैं पर नगर परिषद बनने पर जो आशाएं उम्मीद आम जनता को थी वह तो पूरी हुई नहीं। लेकिन आम जनता की परेशानियां बढ़ गई।
इन 6 वर्षो के दौरान कई सीएमओ आए और गए लेकिन नगर परिषद क्षेत्र की मूलभूत समस्या जैसे बस स्टैंड पर शौचालय, प्रतीक्षालय, साप्ताहिक बाजारों में शौचालय, पेयजल समस्या में प्रतिदिन पेयजल सप्लाई, आधा नगर आज भी हैडपम्प से पानी भरने पर मजबूर, बारिश के पानी की निकासी, नालो पर अतिक्रमण जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी जनता तरस रही है।
शासकीय आबादी भूमि का मामला
घोड़ाडोंगरी की शासकीय आबादी भूमि 667 का मामला भी शुभ लाभ के चक्कर में विवादित कर रखा है। इस भूमि पर पीढियों से रह रहे लोग अपने अधिकार को तरस रहे हैं। वही शुभ लाभ के खेल में जमीन को बेचने के लिए नगर परिषद से एनओसी लेकर जमीन बिकने के बाद नामांतरण हो जाता है। लेकिन जो लोग पीढियों से काबीज हैं वह आज भी फौती नामांतरण जैसे मूल नामांतरण को तरस रहे हैं। तत्कालीन ग्राम पंचायत कार्यकाल में पंचायत द्वारा मनमर्जी पट्टा वितरण कर दिया गया था। जो आज वर्तमान परिवारों में विवाद का मुख्य कारण बना हुआ है।
वर्तमान में फिर एक बार नगर परिषद में नई सीएमओ ज्योति सुनहरे ने पदभार संभाला है। जो अपनी दबंग कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं।
क्या अब घोड़ाडोगरी का कुछ कायाकल्प होगा? यहां प्रश्न आम जनता के मन में चल रहा है। हमेशा कुछ नया करने के कारण सुर्खियों में रहने वाली सीएमओ ज्योति सुनहरे से क्षेत्र की आमजनता उम्मीद लगाए बैठी है की कुछ नवाचार घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में हो जिससे यहां का भी कायाकल्प हो जाए।
दबंग कार्यशैली और व्यक्तित्व के कारण जानी जाने वाली सीएमओ ज्योति सुनहरे हमेशा ही चर्चाओं का केंद्र रही हैं जो अधिकारी कुछ नया करता है उसके साथ प्रशंसा और विवाद दोनों का गहरा नाता रहा है। ऐसी ही कुछ कार्यशाली के कारण वे जानी जाती रही हैं।
सहारनपुर में अपनी पदस्थापना के दौरान खुद के हाथों से बनाई हुई गणेश प्रतिमा का विधि विधान से स्थापना की थी। सुरखी विधानसभा के राहतगढ़ में गर्मी के दिनों में हुए मतदान के दौरान उन्होंने मतदाताओं और कर्मचारियों के लिए शरबत की व्यवस्था कराई। सारंगपुर में होटलो में सफाई का जायजा लिया। राहतगढ़ में एक दिन छोड़कर मिलने वाले पेयजल व्यवस्था को दूरस्त कराकर प्रतिदिन पानी की सप्लाई सुनिश्चित कराई। सारंगपुर में काम नहीं करने वाले अस्थाई कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए हटाने की कार्रवाई तक कर दी।

टीकमगढ़, बड़ागांव धसान, सारंगपुर, सांची, रायसेन, दमोह पथरिया, बुधनी नगर परिषद में पदस्थ रही और अपनी कार्यशैली के कारण सुर्खियों में रही।
टीकमगढ़ में बतौर सीएमओ (मुख्य नगर पालिका अधिकारी) ज्योति सुनहरे की कार्यशैली सख्त और प्रशासनिक रही है। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही अतिक्रमण विरोधी अभियान और न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन में शहर की व्यवस्थाओं में सुधार करने जैसे कदम उठाए हैं।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कार्यशैली के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार रहे हैं:
सख्त रुख और अतिक्रमण पर कार्रवाई: उन्होंने पदभार संभालते ही शहर में अतिक्रमण हटाने और अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई करने (जैसे सरदार सिंह मार्केट में बुलडोजर का चलना) को प्राथमिकता दी।
न्यायालयीन आदेशों का अनुपालनः न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराते हुए बाजार की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने के लिए उन्होंने औचक निरीक्षण किए हैं।
सारंगपुर की कार्यशैली विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई का केंद्र रही है। उनके कार्यकाल में नपाध्यक्ष और राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ टकराव, ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्ती, उन्होंने ड्यूटी के दौरान सोने वाले सफाई कर्मचारियों के खिलाफ औचक निरीक्षण कर सख्ती की थी, जिससे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया था।
दमोह (पथरिया) में कार्यशैली कठोर, नियम-आधारित और दबंग मानी जाती है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने और अनैतिक कार्यो पर सख्ती से रोक लगाने जैसे साहसिक कदम उठाए। उनकी यह शैली कई बार स्थानीय नेताओं और भू-माफियाओं के विरोध का कारण भी बनी।
राजनीतिक विरोध और धमकियां: अनैतिक कार्यों और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के कारण उन्हें कई बार भारी राजनीतिक दबाव और विरोध का सामना करना पड़ा। दमोह में पदस्थापना के दौरान उन्हें स्थानीय नेताओं के रिश्तेदारों से गंभीर धमकियां भी मिली थीं।
विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई: अपनी कार्यशैली के चलते वे कुछ विवादों में भी रहीं। उन पर प्रशासनिक स्तर पर अनियमितताओं और राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोप भी लगे, जिसके बाद उन पर अनुशासनात्मक प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई।
टीकमगढ़ में पदस्थापना के दौरान अतिक्रमण हटाए अभियान के तहत उन्होंने सरदार सिंह मार्केट पर बुलडोजर कार्रवाई की थी, जो काफी चर्चा में रही थी।
सीहोर जिले के बुधनी में कार्यकाल विवादों, धमकियों और उन पर हुए हिंसक हमलों को लेकर चर्चा में रहा था। बुधनी में पदस्थापना के दौरान उनकी कार्यशैली सख्त और विवादों को सुलझाने वाली रही थी, जिसके विरोध में असामाजिक तत्वों द्वारा उनकी गाड़ी तक जला दी गई थी।
धमकियां और हिंसक विरोधः
बुधनी में अतिक्रमण विरोधी अभियानों और सख्त प्रशासनिक फैसलों के कारण उन्हें लगातार धमकियां मिलीं, जिसके बाद उनकी कार को आग लगाने जैसी गंभीर घटना भी हुई।







