बांस के सजावटी सामान, लेम्प, गुलदस्ता आदि बनाना सीखा
स्वरोजगार स्थापित कर सकते है युवक -युवती
बैतूल। मध्यप्रदेश प्राद्योगिकी परिषद् भोपाल की योजनान्तर्गत बांस शिल्प कला और अनुसंधान केंद्र भारत भारती परिसर में बांस शिल्प प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें बैतूल विकासखंड के 75 जनजाति युवा युवतियों ने बांस के सजावटी सामान, लेम्प, गुलदस्ता आदि बनाना सीखा। इस अवसर पर भारत भारती आईटीआई के प्राचार्य विकास विश्वास, प्रशिक्षण अधिकारी अखिलेश शर्मा, प्रशिक्षक नरेन्द्र मोहबे उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण अधिकारी शर्मा ने बताया कि हमारे जनजाति युवा युवती पढ़ाई के बाद नौकरियों की खोज में लगे रहते हैं। जबकि कौशल विकास के अनेक ऐसे काम है, जिनको बिना किसी लागत के सरलता से सीखे और अपनाये जा सकते हैं। बांस शिल्प उन्ही में से एक है।

आज कल अपने घरों, उद्यानों की सजावट, बांस की कुर्सियां, फूलदान, लैंप आदि की बाजार में मांग भी है साथ ही बाजार में संभावनाएं भी अधिक हैं। दूसरा पक्ष यह भी है कि इस काम में आंशिक लागत से भी यह स्वरोजगार अपनाया जा सकता है। और अपने तैयार किये सामान की ब्रांडिंग करके इसे बड़े मंचों पर पहचान दिला सकते हैं।








