रेल्वे पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन कार्यालय आमला में बाबा साहब के छायाचित्र पर माल्यार्पण किया
आमला। डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135 वीं जयंती के उपलक्ष्य में बस स्टेंड आमला पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर विचार मंच ने अंबेडकर जी के स्टैच्यू पर माल्यापर्ण किया। बाबा साहब के स्टैच्यू पर माल्यार्पण करने के पश्चात कार्यक्रम का आयोजन किया। वही रेल्वे पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन कार्यालय आमला में भी बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर बड़े हर्षोल्लास के साथ जयंती रेलवे के पेंशनरों कर्मचारियों ने मनाई।

कार्यक्रम में बाबासाहेब के विचारों, उनके योगदान एवं सामाजिक समरसता पर अपने विचार व्यक्त किये।
श्रमिक संगठन के प्रदेशाध्यक्ष व बाबासाहेब विचार मंच के पदाधिकारी फूलचंद वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि बाबासाहेब का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने श्रमिकों के कार्य समय को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे करने, न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को शिक्षा एवं मतदान का अधिकार, तथा सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने औद्योगिक विकास, बैंकिंग प्रणाली और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आधुनिक भारत की नींव रखीं।

केएल चौकीकर ने कहा कि बाबासाहेब का जीवन संघर्ष, संकल्प और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और कोलंबिया जैसे संस्थान में अध्ययन कर यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। उन्होंने विश्व के सबसे अच्छे संविधान का निर्माण किया जिसके बल आज हम सभी सामाजिक समरसता, समानता, बंधुत्व और एकता की भावना से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने सभी से बाबासाहेब के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

बाबासाहेब आंबेडकर विचार मंच के पदाधिकारी व समाजसेवी संजय सातनकर ने बाबासाहेब के संविधान निर्माण और सामाजिक समरसता में योगदान को याद करते हुए उनके पदचिह्नों पर चलने का संदेश दिया।
शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे हर समस्या का समाधान संभव है और बाबासाहेब ने समाज को यही दिशा दी।

इस अवसर पर बाबासाहेब अम्बेडकर विचारमंच के पदाधिकारी सदस्यगण केएल चौकीकर, फूलचंद वर्मा, संजय सातनकर, विनोद बेले, विक्की पारधी, राजू चौकीकर, चौकीकर गुरुजी, बसंत अतुलकर, हरिदास बड़ोदे, कमल हुरमाडे, कृष्णा बोरकर, रामरतन जौंजारे, रामचरण पंवार सहित महिलाएं आदि नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।






