नाबालिक है पारदी जनजाति समुदाय की बेटी “मोनालिसा”
आरोपी फरमान पर कसा मध्य प्रदेश पुलिस का शिकंजा
पॉक्सो BNS एवं एट्रोसिटी एक्ट के अंतर्गत FIR दर्ज
महेश्वर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली की जांच खत्म नाबालिक है पारदी जनजाति समुदाय की बेटी “मोनालिसा”,
महेश्वर की ‘मोनालिसा’ मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच के बाद एक चौंकाने वाला मोड़ आया है। अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में आयोग की सक्रियता और पूर्व न्यायाधीश व NCST सलाहकार प्रकाश उइके के मार्गदर्शन में अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा की गई कानूनी पैरवी ने यह साबित कर दिया है कि जिस युवती को बालिग बताकर विवाह कराया गया था, वह वास्तव में पारदी जनजाति समुदाय की एक नाबालिग लड़की है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष अन्तर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक गहन छानबीन की एवं मात्र 72 घंटे में केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक सारे तार जोड़ कर सच को उजागर कर दिया। सलाहकार प्रकाश ऊईके एवं निदेशक पी. कल्याण रेड़ी की जांच महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में नाबालिग निकली मोनालिसा।

जांचदल ने पाया कि यह गलत जन्म प्रमाण पत्र नगर पालिका महेश्वर से जारी किया गया है। उसके बाद जांचदल ने तत्काल महेश्वर के सरकारी मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की एवं पाया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 हुआ था। जिसके आधार पर वह केरल में संपन्न विवाह 11 मार्च, 2026 को मात्र 16 वर्ष 2 माह और 12 दिन की थी। साथ ही जांच टीम ने पूर्व में स्थानीय नगर पालिका महेश्वर द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र जो गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी किया गया है जिसमें मोनालिसा की जन्म तिथि 1/1/2008 लिखाई गई थी, उसे निरस्त करवाने में भी कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया।
आरोपी फरमान पर कसा मध्य प्रदेश पुलिस का शिकंजा:
खरगोन जिले के थाना महेश्वर में पॉक्सो BNS एवं एट्रोसिटी एक्ट के अंतर्गत FIR दर्ज। आरोपी फरमान के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अगली कार्रवाई:
इस खुलासे के बाद आयोग अब दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। नाबालिग के विवाह और इसमें शामिल राजनीतिक व कट्टरपंथी संगठनों की भूमिका की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। पारदी जनजाति की इस नाबालिग बेटी के साथ हुए अन्याय ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह दोषियों को सजा मिलने तक इस कार्यवाही पर पैनी नजर बनाए रखेगा एवं हर तीन दिन में मध्यप्रदेश और केरल के डीजीपी से उपरोक्त केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है।






