तीन महीनों में भी आश्वासन के बावजूद प्रशासन से साफ पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी
बैतूल के दानवाखेड़ा में इंदौर दूषित पानी कांड जैसे हालात
बैतूल। बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के करीब 50किलोमीटर दूर आदिवासी गाँव दानवाखेड़ा में दूषित पानी की समस्या हल नहीं हो रही है। इस गांव के आदिवासी बच्चे फिर खुजली से पीड़ित होने लगे हैं गौरतलब हो कि इसके पूर्व मैं दो बच्चों की मौत इसी दूषित पानी के सेवन से हो चुकी है।

उल्लेखनीय की ग्रामीणों ने प्रशासन से साफ पानी की व्यवस्था करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का एक दल 20 जनवरी2026 को श्रमिक आदिवासी संगठन एवं समाजवादी जन परिषद के नेतृत्व में उपजिला पंचायत अधिकारी एवं अतरिक्त कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्या से अवगत करवाया था।
जिला पंचायत सीईओ को सौंपें गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि दूषित पानी के चलते विगत 2 माह से यह गाँव खुजली के प्रकोप से जूझ रहा है। संगठन के राजेन्द्र गढ़वाल ने बताया कि इससे 2 बच्चों की मौत भी हो गई है। प्रशासन के आश्वासन के बावजूद भी यहाँ अभी तक हैण्डपंप नहीं लगाया है। 20 जनवरी को हुई मुलाकात में भी प्रशासन वन विभाग से अनुमति की बात कर टालमटोल करता नजर आया है।
राष्ट्रभूमि की टीम ने गांव में सम्पर्क किया तो सजप के अनुराग मोदी से बातचीत में उक्त जानकारी देते
बताया कि दूषित पानी के चलते आने वाले माह में भयंकर बीमारी फैलने की सम्भावना बन सकती है।
ज्ञात हो कि इस मुद्दे को दिसम्बर माह की शुरुवात में ही प्रशासन की जानकरी में लाया गया था। इसके बाद अधिकारियों ने गाँव का दौरा किया और साफ पानी की व्यवस्था करने के लिए गाँव में हैण्डपंप खोदने का आश्वासन दिया था। लेकिन अधिकारीयों ने ग्रामीणों से खुदाई हेतु ट्रक पहुँच मार्ग श्रमदान से तैयार करने को कहा था।
ग्रामीणों द्वारा सड़क का निर्माण कार्य पूरा किए 1 माह से ज्यादा का समय हो गया लेकिन अभीतक हेंण्डपंप खुदाई का काम शुरू होने के कोई आसार नजर नहीं आते। जबकि बीमारी का प्रकोप अभी भी जारी है।
यह गाँव शासन की सभी मूलभूत सुविधाओं से वंछित है, न आंगनवाडी है, न सड़क, न बिजली, न पीने योग्य पानी, न स्कूल, न चिकित्सीय टीम का दौरा ओर भी अन्य सुविधाएं जो मिलना चाहिए। कुछ भी नहीं है कैसे हम डिजिटल इंडिया का ख्वाब देख रहे हैं?
दूषित पीने के पानी के चलते विगत 2 माह से यह दानवाखेड़ा गाँव खुजली के प्रकोप से पीड़ित है। इसमें 2 नन्हे-मुन्ने बच्चों की मौत हो गई और सैंकड़ों बच्चों को खुजली के प्रकोप ने जकड़ लिया।
शासन या प्रशासन क्या कर रहा है सवाल तो खड़ा है?






