लोक अदालत के माध्यम से टूटे परिवार फिर हुए एक
बैतूल। शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लंबित प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया। लोक अदालत में कई ऐसे पारिवारिक विवाद भी सुलझे, जिसमें मनमुटाव के कारण परिवार लंबे समय से अलग-अलग रह रहे थे। लोक अदालत के माध्यम से इन टूटे रिश्तों को फिर से जोड़ते हुए साथ रहने के लिए राजी किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों के निराकरण के लिए कुल 27 खंडपीठों का गठन किया गया था। इन खंडपीठों में सडक दुर्घटना, पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस, मोटर व्हीकल, विद्युत चोरी, भूमि अधिग्रहण, ट्रैफिक चालान और श्रमिक मामलों सहित कई प्रकरणों की सुनवाई कर आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
कुटुंब न्यायालय में भी कई पारिवारिक मामलों का समाधान हुआ। इनमें मिलानपुर निवासी एक दंपति का मामला विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। पति-पत्नी के बीच विवाद के कारण दोनों करीब दो वर्षों से अलग रह रहे थे। लोक अदालत में समझाइश और आपसी सहमति के बाद दोनों के बीच सुलह हो गई और वे पुन: साथ रहने के लिए राजी हो गए।
इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक से संबंधित एक चेक बाउंस का मामला भी लोक अदालत में सुलझाया गया।
एमपीईबी से जुड़े एक मामले में लेखीराम यादव का राजीनामा कराया गया। इन प्रकरणों के समाधान में अधिवक्ता हीरामन सूर्यवंशी, संजय शुक्ला तथा सहयोगी अधिवक्ता अर्जुन लिखितकर, राजकुमार कांगले, आनंद खातरकर और दीपांशु का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शाम 5 बजे तक 55 लाख जमा ……
नगर पालिका कार्यालय में आयोजित लोक अदालत में बकायादारों ने पहुंचकर करों का भुगतान किया और सरचार्ज का लाभ लिया। नपा के वरिष्ठ राजस्व निरीक्षक ब्रजगोपाल परते ने बताया कि संपत्ति कर, समेकित कर, सामान्य जलकर, जल शुल्क, दुकान/भवन भूमि किराया, शिक्षा उपकर, नगरीय विकास उपकर के बकायदारों ने करों का भुगतान किया।
शाम 5 बजे तक नगरपालिका को टैक्स के माध्यम से करीब 55 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
बताया जा रहा है कि लोक अदालत के लिए लगभग 850 बड़े बकायादारों को नोटिस जारी किए गए थे, जिन पर संपत्ति कर, जलकर और दुकानों का किराया बकाया था। लोक अदालत में बकाया राशि जमा कराई गई।
इसके परिणामस्वरूप नगर पालिका को लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।






