आधुनिक कृषि यंत्रीकरण अपनाने से किसान संजय कुमार साहू को खेती की लागत में आई कमी
बैतूल। गेहूं कटाई के बाद हर वर्ष सामने आने वाली नरवाई जलाने की समस्या को ध्यान में रखते हुए कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा इस वर्ष विशेष तैयारी की गई है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशन में नरवाई प्रबंधन के लिए किसानों के बीच रीपर कम बाइंडर एवं स्ट्रॉ रीपर यंत्र का जीवंत प्रदर्शन तथा नरवाई प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन किया गया। बैतूल विकासखंड के ग्राम रौंदा के प्रगतिशील किसान संजय कुमार साहू ने आधुनिक कृषि यंत्रीकरण अपनाकर न केवल अपनी खेती की लागत कम की, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन में भी एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसान द्वारा रीपर कम बाइंडर से गेहूं की कटाई की गई, जिसका प्रदर्शन अन्य किसानों के सामने किया गया।

कार्यशाला में सहायक कृषि यंत्री डॉ. प्रमोद कुमार मीना ने यंत्र की कार्यप्रणाली तथा अनुदान प्रक्रिया की जानकारी किसानों को दी। उन्होंने बताया कि इस यंत्र से कटाई के बाद खेत में गेहूं की नरवाई केवल 4–5 इंच तक ही बचती है, जिससे उसे जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और अगली फसल के लिए खेत जल्दी तैयार हो जाता है। इसी क्रम में ग्राम हिवड़खेड़ी में भी नरवाई प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें स्ट्रॉ रीपर यंत्र का फील्ड प्रदर्शन किया गया। कम्बाइन हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई के बाद स्ट्रॉ रीपर के माध्यम से नरवाई को भूसे में परिवर्तित कर किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉ रीपर से तैयार भूसा बाजार में लगभग 2000 रुपये प्रति ट्रॉली तक बिक जाता है। इसके साथ ही कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद एक एकड़ खेत में बचा हुआ 15 से 50 किलोग्राम तक गेहूं भी एकत्र किया जा सकता है, जिससे किसानों को 375 से 1250 रुपये प्रति एकड़ तक अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है।
कार्यक्रम के दौरान विभाग द्वारा किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील की गई तथा उसके समुचित प्रबंधन के लिए स्ट्रॉ रीपर, रीपर कम बाइंडर, हैप्पी सीडर/सुपर सीडर, रोटावेटर और मल्चर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर विभागीय कर्मचारी एवं किसान लखन पवार, निखिल पवार, दिनेश पवार सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।
क्रमांक 40/349/03/2026







