रेत ठेकेदार परम कॉन्ट्रेक्शन की लूट,, 45 रुपए घनफिट बेची जा रही रेत ?
सप्लायर ने आंदोलन का बनाया मन, जल्द फूटेगा गुस्सा
बैतूल। बैतूल जिले में रेत के बढ़ते दामों को लेकर भवन निर्माताओं और रेत सप्लायरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि रेत की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम भवन निर्माताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। रेत सप्लायरों का आरोप है कि परम कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से दबाव बनाया जाता है। इसका विरोध करने वालों को कार्रवाई की धमकी दी जाती है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी से जुड़े व्यक्ति द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों से प्रभावशाली संबंध होने की बातें कही जाती हैं। इन आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रेत की कीमतों और आपूर्ति को लेकर नियमों का पालन हो रहा है, तो प्रशासन द्वारा इसकी पारदर्शी जांच और रेट की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है?
रेत सप्लायरों ने मांग की है कि कलेक्टर और खनिज विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, रेत के वास्तविक बिक्री मूल्य और ठेके की शर्तों को सार्वजनिक करें तथा यदि किसी व्यक्ति द्वारा धमकी या दबाव बनाया गया है, तो उसकी भी जांच की जाए। सप्लायरों का कहना है कि वे अपनी शिकायत संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने की तैयारी में हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने कब तक स्पष्ट करता है।

बिना रॉयल्टी 2 हजार 800 रुपये और रॉयल्टी के साथ ट्रैक्टर के 5 हजार रूपेय तक वसूले जाने का दावा
बैतूल जिले में रेत की कीमतों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और भवन निर्माण से जुड़े लोगों का आरोप है कि रेत कंपनी परम कंस्ट्रक्शन द्वारा निर्धारित नियम-कायदों को दरकिनार कर मनमाने दामों पर रेत उपलब्ध कराई जा रही है। लोगों का कहना है कि बिना रॉयल्टी के एक ट्रैक्टर रेत के लिए करीब 2 हजार 800 रुपये जबकि रॉयल्टी सहित ट्रैक्टर के लिए करीब 5 हजार तक की राशि ली जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रेत की वास्तविक कीमत और शासन द्वारा निर्धारित रॉयल्टी के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है?
सबसे गंभीर सवाल बिना रॉयल्टी रेत के टोकन के नाम पर बिक्री को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परम कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा रेत के दाम अचानक बढ़ाए जाने से निर्माण सामग्री की लागत में भारी इजाफा हो गया है। लोगों के मुताबिक रेत के भाव पहले की तुलना में लगभग दोगुने हो जाने से अब नया मकान बनाना तो दूर, पुराने मकान की मरम्मत कराना मुश्किल हो रहा है।
रेत के दामों को लेकर उठे सवाल, रॉयल्टी के नाम पर मनमानी वसूली का आरोप
इस तरह की व्यवस्था लंबे समय से चल रही है तो संबंधित खनिज विभाग, पुलिस और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर अब तक क्यों नहीं पड़ी ?
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि दूसरे जिलों से रेत मंगवाने पर भी लागत इतनी अधिक नहीं पड़ती, जितनी स्थानीय स्तर पर रॉयल्टी और अन्य शुल्क के नाम पर वसूली की जा रही है।
इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। यदि निर्धारित रॉयल्टी से अधिक राशि वसूली जा रही है या बिना वैध रॉयल्टी के रेत का कारोबार हो रहा है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होना चाहिए। साथ ही प्रशासन को रेत के वास्तविक मूल्य, रॉयल्टी, परिवहन शुल्क और उपभोक्ताओं से ली जा रहीं कुल राशि को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके। अब सवाल यह है कि प्रशासन इन शिकायतों और आरोपों की जांच कब करेगा और रेत के दामों में कथित मनमानी पर रोक कब लगेगी ?
महंगी रेत बनी निर्माण में परेशानी
जिला पहले से ही रोजगार और पलायन की समस्या से जूझ रहा है, तब निर्माण सामग्री महंगी होने का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि प्रशासन रेत के बढ़े हुए दामों की जांच करे, दरों की वास्तविकता सामने लाए और यह सुनिश्चित करे कि आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न बड़े।
इनका कहना
रेत के दाम हम तय नहीं करते हैं। हमारे पास रॉयल्टी की जिम्मेदारी है। रेत परिवहन करने पर रॉयल्टी होनी चाहिए। रॉयल्टी रसीद ना होने पर कार्रवाई की जाती है।
मनीष पालेवार, डिप्टी डायरेक्टर खनिज विभाग, बैतूल






